क्या तुम रूकोगी नहीं?


Antarvasna, kamukta: मां कहने लगी सुरभि बेटा तुम कपड़े धो दो मैंने मां से कहा ठीक है माँ मैं कपड़े धो देती हूं मां कहने लगी तुम वॉशिंग मशीन में कपड़े डाल देना मैं देख लूंगी। मैंने वॉशिंग मशीन में कपड़े डाल दिए और उसके बाद मैं अपने कमरे में चली गई और मां कपड़े देखने लगी जब कपड़े धुल गए तो मां ने कहा बेटा इन्हें नहीं छत पर सुखा दो। मैंने कपड़ों को छत पर सुखा दिया और जब मैं नीचे आ रही थी तो मेरा पैर सीढ़ियों से फिसल गया जब मेरा पैर सीढ़ियों से फिसला तो मैं बहुत ही तेजी से नीचे गिर पड़ी जिससे कि मेरे पैर पर चोट आ गई थी। मेरी मां दौड़ती हुई सीढ़ियों की तरफ आई और कहने लगी कि बेटा तुम्हें चोट तो नहीं आई मैंने मां से कहा मां मेरे पैर से खून आ रहा है।

मां ने मुझे उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया मेरे पैर से बहुत ज्यादा खून निकल रहा था उन्होंने रुई और डेटोल से मेरे खून को साफ किया। मेरे पैर से अब खून निकलना तो बंद हो चुका था और मैंने मेरे पैर पर पट्टी लगा दी थी मैंने पैर पर पट्टी लगा दी तो मैंने मां से कहा मां मैं कुछ देर आराम करना चाहती हूं। मां कहने लगी हां बेटा तुम आराम कर लो फिर मैंने कुछ देर आराम किया कुछ देर आराम करने के बाद मैं ऊठी तो पापा भी ऑफिस से आ चुके थे। पापा ने मम्मी से पूछा कि सुरभि को क्या हुआ तो मां ने बताया कि सुरभि का पैर सीढ़ियों से फिसल गया था और वह नीचे गिर गई जिस वजह से उसे चोट आई है पापा कहने लगे सुरभि को ज्यादा चोट तो नहीं आई। मैंने पापा से कहा नहीं पापा ज्यादा चोट तो नहीं आई लेकिन पैर में दर्द हो रहा है पापा कहने लगे कोई बात नहीं बेटा तुम आराम करो। मेरी मां हमेशा से ही कहती है कि तुम अपने पापा की बहुत लाडली हो और इसी वजह से वह मेरी बहुत ज्यादा चिंता करते हैं। कुछ समय बाद मेरा पैर ठीक होने लगा तो मैं अपनी नौकरी के लिए ट्राई करने लगी मेरा कॉलेज पूरा हुए अभी कुछ ही समय हुआ था और मैं चाहती थी कि मैं कहीं नौकरी करूं।

मैंने एक प्राइवेट संस्थान में नौकरी करनी शुरू कर दी और पापा मुझे कहने लगे कि बेटा तुम नौकरी कर के क्या करोगी तुम्हें भला नौकरी की क्या आवश्यकता है मैंने पापा से कहा पापा लेकिन घर पर भी मैं अकेले क्या करूंगी। मैं घर में इकलौती हूं इसीलिए मैं घर में बहुत बोर हो जाया करती थी और पापा ने मुझे कहा कि ठीक है सुरभि बेटा जैसा तुम्हें ठीक लगता है यदि तुम्हें नौकरी करनी है तो तुम कर लो। पापा वैसे तो मुझे किसी भी चीज के लिए मना नहीं करते और ना ही उन्होंने मुझे कभी किसी चीज के लिए मना किया है। पापा मेरा बहुत ध्यान भी रखते हैं और मुझे इस बात की खुशी है कि पापा और मम्मी दोनों ही मुझे बहुत प्यार करते हैं। मैं अपनी नौकरी से भी खुश थी मुझे नौकरी करते हुए करीब 6 महीने हो चुके थे और 6 महीने बाद मेरे लिए लड़कों के रिश्ते आने लगे थे लेकिन मुझे कोई भी लड़का पसंद नहीं आता क्योंकि मेरा नेचर बिल्कुल ही अलग है मैं बहुत ही शांत स्वभाव की हूं तो मैं भला ऐसे ही कैसे पसंद कर सकती थी। इसी बीच हम लोग शादी में मुंबई चले गए मुंबई में मेरे चाचा जी रहते हैं और चाचा जी की लड़की की शादी थी वह मुझसे उम्र में एक वर्ष छोटी है लेकिन उसने लव मैरिज की थी और चाचा जी को भी कोई भी आपत्ति नहीं थी। मुंबई में जाकर मेरे लिए एक चीज अच्छी हुई कि वहां मेरी मुलाकात गौतम से हो गई जब मेरी मुलाकात गौतम से हुई तो मुझे गौतम बहुत अच्छा लगा। कुछ दिन बाद हम दिल्ली लौट चुके थे लेकिन गौतम की यादें मेरे दिल में थी मेरे पास गौतम का नंबर था लेकिन मैंने उसे फोन नहीं किया। एक छोटी सी मुलाकात मेरे दिल में बस गई थी और मुझे गौतम की याद आती रहती थी। मैं दिन रात गौतम के बारे में सोचती रहती थी क्योंकि गौतम का व्यक्तित्व और उसकी कद काठी और वह जिस प्रकार से देखने में हैंडसम था उससे मैं गौरव पर पूरी तरीके से फिदा हो चुकी थी। एक दिन गौतम ने मुझे फोन किया मुझे उम्मीद नहीं थी कि गौतम मुझे कभी फोन करेगा लेकिन जब गौतम ने मुझे फोन किया तो मैंने गौतम से कहा मैं तुम्हारे बारे में अक्सर सोचती रहती हूं। गौतम मुझे कहने लगा तुम मेरे बारे में अक्सर क्या सोचती हो मैंने उसे कहा बस ऐसे ही तुम्हारा चेहरा मेरी आंखों के सामने आ जाता है। मेरे दिल की धड़कन तेज हो चुकी थी और गौतम की दिल की धड़कन भी तेज थी गौरव ने मुझसे अपने प्यार का इजहार कर दिया।

गौरव का इजहार करने का अंदाज मुझे बहुत पसंद आया उसकी बातों ने मुझ पर जादू कर दिया था। मैंने गौतम से कहा क्या हम लोग कभी मिल सकते हैं तो गौतम कहने लगा क्यों नहीं, मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि गौतम मुझे मिलने के लिए दिल्ली आ जाएगा। गौतम के कोई रिलेटिव दिल्ली में ही रहते थे और वह कुछ दिनों के लिए उनके घर पर आया हुआ था गौतम ने जब मुझे फोन किया तो मैं खुश हो गई मुझे उम्मीद नहीं थी कि गौतम इतनी जल्दी मुझसे मिलने के लिए आ जाएगा। जब वह मुझे मिला तो हम दोनों ने एक दूसरे को देखते ही गले लगा लिया। मैंने गौतम से कहा तुमने तो मुझे एकदम से चौका ही दिया मुझे लगा था कि तुम मुझसे मजाक कर रहे हो लेकिन तुमने तो मुझे पूरी तरीके से चौका दिया। गौतम ने मुझे दोबारा से गले लगाया और कहा कि मुझे तुम्हारी याद आ रही थी तो सोचा तुमसे मिल लेता हूं। मैंने गौतम से कहा तुम भी बड़े अजीब हो गौतम कहने लगा इसमें अजीब वाली क्या बात है मैंने गौतम से कहा अब छोड़ो भी जाने दो।

मुझे तो बिल्कुल यकीन ही नहीं हो रहा था कि गौतम मुझसे मिलने के लिए दिल्ली आ चुका है। मैंने गौतम को अपने गले लगा लिया गौतम से कहा मुझे यकीन नहीं आ रहा है। वह मुझे कहने लगे तुम कितनी बार मुझे गले लगाओगे क्या तुम्हें अब भी यकीन नहीं आ रहा। मैंने गौतम से कहा मुझे अब भी यकीन नहीं आ रहा है हम दोनों साथ में ही थे। पास के पार्क मे हम लोग टहलने के लिए चले गए हम लोग साथ मे बैठे थे। हम लोगों ने काफी देर तक बात की मैंने गौतम से कहा मैं अब चलती हूं मुझे देर हो रही है तो वह कहने लगे क्या तुम मेरे लिए  थोड़ी देर और नहीं रुक सकती? मैंने गौतम से कहा ठीक है मैं तुम्हारे लिए थोड़ी देर और रुक जाती हूं लेकिन मुझे घर भी तो जाना है अब देर भी काफी हो चुकी है और अंधेरा भी तो होने लगा है। शाम भी ढलती जा रही थी और अंधेरा परवान चढ़ चुका था लेकिन अंधेरा ही था जो हम दोनों को नजदीक ले आया। जब गौतम ने मुझे अपनी बाहों में लिया तो गौतम की आंखों में एक नशा था और उसके नशे के आगे मैं भी अपने आपको बेबस पाती। गौतम ने जब मेरे होठों को चूमना शुरू किया तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैं गौतम के नशे में पूरी तरीके से चकनाचूर हो चुकी हूं और गौतम की हो चुकी हूं। गौतम ने भी अपने होठों से मेरे होठों को बहुत देर तक चूमा जब गौतम ने मेरे स्तनों को दबाना शुरू किया तो मैं बेचैन होने लगी। पार्क मे अब बहुत कम लोग दिख रहे थे लेकिन हम दोनों तो जैसे अपने आप में ही खो गए थे मैंने गौतम से कहा हम यह ठीक नहीं कर रहे हैं। गौतम कहने लगे मुझे इस समय कुछ भी गलत नहीं लग रहा और यह कहते हुए गौतम ने मेरे हाथ को पकड़ा और मुझे वह अपने साथ ले गए। गौतम मुझे एक गेस्ट हाउस में ले गए और वहां पर हम दोनों ने एक दूसरे के बदन की गर्मी को महसूस करना शुरू किया गौतम ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया।

मेरे कपड़े उतारते हुए मुझे गौतम ने नग्न अवस्था में कर दिया और जब गौतम ने मेरे स्तनों का रसपान करना शुरू किया तो मेरे अंदर से गर्मी बाहर निकलने लगी। गौतम मेरे स्तनों को बड़े ही अच्छे से अपने मुंह के अंदर ले रहे थे। गौतम ने काफी देर तक मेरे स्तनों को चूसा और मेरे स्तनों से दूध बाहर निकल दिया। गौतम ने मेरी योनि पर अपनी जीभ का स्पर्श किया और मुझे अपना बना लिया काफी देर तक गौतम ने मेरी योनि के मजा लिया वह मेरी योनि को बड़े ही अच्छे तरीके से चाट रहे थे और मेरी योनि से गिला पदार्थ तेजी से बाहर निकलने लगा था। मैं अपने पैरों को चौड़ा करती जाती मेरी योनि से पानी बड़ी तेज मात्रा में बाहर निकल रहा था। मैंने गौतम के लंड को देखा तो मैंने कहा मैं इसे कैसे अपनी योनि में लूंगी तो वह मुझे कहने लगे तुम उसकी बिल्कुल भी चिंता मत करो। तुम लंड को अपनी योनि में जरूर ले पाओगे और यह कहते ही गौतम ने अपने लंड को चूत पर लगाया तो गौतम के लंड का आगे का हिस्सा मेरी योनि के अंदर प्रवेश हो चुका था।

मुझे बहुत घबराहट महसूस हो रही थी मैंने गौतम को कसकर पकड़ लिया और गौतम ने अपने लंड को मेरी योनि के अंदर घुसाना शुरू किया। जैसी ही गौतम का लंड मेरी योनि के अंदर घुसने लगा तो मैं चिल्लाने लगी। गौतम का लंड मेरी चूत के अंदर प्रवेश हो चुका था जैसे ही गौतम का लंड मेरी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो मै चिल्लाने लगी। मैंने अपने पैरों को खोल लिया गौतम का लंड मेरी योनि के अंदर बाहर होता तो मेरी योनि से फच फच की आवाज निकलती और मेरे मुंह से मादक आवाज निकल रही थी। मेरी मादक आवाज स गौतम उत्तेजित होने लगे थे वह इतना ज्यादा उत्तेजित होने लगे कि मुझे और भी मजा आने लगा। मैं काफी देर तक गौतम के साथ संभोग का मजा लेती रही लेकिन मेरी योनि से खून अब रुक नहीं रहा था वह तो मुझे लगातार तेज गति से धक्के दिए जा रहे थे। उनके धक्को मे भी तेजी आ चुकी थी जैसे ही गौतम ने अपने वीर्य को मेरी योनि की शोभा बनाया तो मैने गौतम से कहा तुम मुझे घर छोड दो।




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